मराठा साम्राज्य का इतिहास और शासनकाल | Maratha Empire History in Hindi

हैलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक नई पोस्ट में दोस्तों आज के इस पोस्ट में मैं आपको मराठा साम्राज्य के इतिहास  के बारे में बताउँगा तो आप से बस एक ही Request है की आप जब भी कोई आर्टिकल को पढ़ते हो तो उसे ध्यान से पढ़ें ।


मराठा साम्राज्य का इतिहास और शासनकाल

मराठा साम्राज्य का इतिहास और शासनकाल | Maratha Empire History in Hindi

मराठा साम्राज्य का संस्थापक छत्रपति  शिवाजी महाराज हैं । इस साम्राराज्य को मराठा परिसंघ के नाम से भी जाना जाता है । मराठा  साम्राज्य के पूर्वज राजस्थान के सीसोदिया वंश के सूर्यवंशी राजपूत थे मराठा साम्राज्य की  स्थापना  1664 ईस्वी में  किया गया था और यह साम्राज्य 1664 से लेकर 1818 तक चला । यह सतरहवी से अठरवी सदी में भारत के बिसाल क्षेत्र पर विस्तार थे । लेकिन जब माधवराव प्रथम की मृत्यु हो जाता है तो मराठा साम्राज्य का कमान पेशवा के हातों में आ जाता है जिसकी वजह से मराठा साम्राज्य की पतन शुरू हो जाती है । 

मराठा साम्राज्य चार्ट 

साम्राज्य                      मराठा साम्राज्य                      

संस्थापक                  शिवाजी भौंसले  महाराज 

स्थापित                            1674

प्रथम शासक              शिवाजी भौंसले  महाराज 

शासन काल               1674-1818

 छत्रपति शिवाजी महाराज 

छत्रपति शिवाजी का जन्म 20 अप्रैल 1627 ईस्वी में पुना  के निकट शिवनेर नामक स्थान पर हुआ था । इनके पिता जी का नाम शाह जी भौसलें था । तथा माता  जीजाबाई थी जिनका प्रभाव शिवाजी महाराज पर बहुत अधिक प्रभाव पद था । तथा इनके राजनैतिक  गुरु  दादा कोंददेव थे  और इनके आध्यात्मिक गुरु राम दस थे । इनके पहली पत्नी का नाम साइबाई थी । 

शिवाजी का प्रथम सैन्य अभियान  बीजापुर में नादिर शाह के विरुद्ध  1643  में  होता है जिसमे शिवाजी शिंहगढ़  होती है । यह अभियानहुआ था । तथा उसके कुछ  बाद फिर एक अभियान 1654 में किया जिसमें पुरंडेर के किले को जीता  था। फिर कुछ दिन बाद अफजल खाँ से बीजापुर में  संघर्ष  होता है  । फिर औरंगएब के मामा के साथ संघर्ष होता है । 

  • उसके बाद सूरत की प्रथम लूट 1664 ईस्वी में 
  • पुरंदर  की संधि 22 जून 1665 में 
  • 1666 मे औरंजेब शिवाजी को जाईपुरी महल में बंदी बनाता है 
  • 1666 में ही शिवाजी भाग जाता है 
  • फिर 1670 में सूरत की पुनः लूट 
  • शिवाजी का राज्य अभिषेक 6 जून 1674 को गंगभट्ट के द्वारा किया गया था 
  • इसी दौरान दूसरी सादी 
  • कर्नाटक अभियान शाइस्ता खान के विरुद्ध किया जिसमें जिनजी का किला जीत जाता है ।    


शिवाजी का प्रशासन :- 

शिवाजी का एक महत्वपूर्ण प्रशासन नियम था जिसका नाम असतप्रधान था । इस प्रशासन वेवस्था में आठ कर्मचारी हुआ करते थे जो निम्न प्रकार के होते थे :

  • पेशवा - प्रधानमंत्री की तरह 
  • अमात्य - अन्नमंत्री 
  • सामंत - विदेशमंत्री 
  • चिरनिस - प्रत्राचार  
  • सैनापती - सैनिक का मैन पावर 
  • न्यायधीश -न्याय करने वाला 
  • पण्डिताराव -मुख्य सलाहकार , धार्मिक रूप से 
  • वाकनविस  - गुप्तचर , सूचना विभाग 

शिवाजी का महत्वपूर्ण tax 

1. सरदेशमुखी :- यह कर शिवाजी अपने अधिकृत क्षेत्र से लेता था । जिसपर उसका अपना अधिकार होता था । 

2. चौथ :- यह कर शिवाजी उन क्षेत्रों से लेता था जीनपर उनका पूर्ण अधिकर नहीं होता था । मतलव उनके पड़ोसी क्षेत्रों से   

     उसके बाद 1680 मे शिवाजी की मृत्यु हो जाती है । 

छत्रपती शिवाजी के उतराधिकारी 
1) संभाजी  2) शाहूजि  3)राजाराम 4)शिवाजी-II

शिवाजी के मृत्यु के बाद संभाजी जो पनहाला के किला में कैद थे वे वहाँ से भागकर मराठा साम्राज्य के राज्य अर्थात छत्रपती बने । फिर 1686 ईस्वी में संभाजी ने औरंजेब के बिद्रोही  पुत्र अकबर-II  को शरण दे देता है जिस कारण औरंजेब ने संभाजी को यातना देकर मार दिया तथा उनके पुत्र शाहू जी को  बंदी बना लेता है । इसके बाद मराठा साम्राज्य का छत्रपती  बन जाता है । लेकिन कुछ दिन बाद 1700 में राजा राम की मृत्यु हो जाती है उसके बाद राजा राम की पत्नी तारा बाई ने अपनी छोटी आयु वाले पुत्र शिवाजी द्वितीय को बना दी शासक बना दिया और खुद उसकी संरक्षिका बन गई साहू जी जो मुगल दरबार में कैद था वह बहादुर शाह के मराठा शक्ति को कमजोर करने के लिए छोड़ दिया बहादुर शाह जफर ने सोचा कि अभी जो शासक शिवाजी द्वितीय बना है वह अभी काफी छोटी उम्र का है जिस कारण साहू को छोड़ दिया । साहू जी ने शिवाजी द्वितीय को पराजित करके खुद छत्रपति अर्थात राजा बन गया किंतु 1749 में शाहूजी की मृत्यु हो जाती है इनकी मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य का सारी शक्तियां पेशवा के हाथों में आ जाता है।

पेशवा साम्राज्य(1713 से 1818)

पेशवा मराठा साम्राज्य के अष्टप्रधान में से सबसे प्रमुख होता है । पेशवा वंशानुगत होता था जो कि एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी आती थी जिसमें से प्रमुख पेशवा को बनाया जाता था।

1 ). बालाजी विश्वनाथ(1713-1720)

 बालाजी विश्वनाथ को साहू जी ने पेशवा बनाया था और बालाजी विश्वनाथ के सहयोग से ही साहू जी छत्रपति बने थे। साहू जी ने इन्हें अपना प्रतिनिधि बनाकर मुगल शासक फर्रूखसियर के दरबार में भेजा था फर्रूखसियर ने छत्रपति के पद को मान्यता दे दिया इस संधि को मराठा शासन का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। लेकिन 1720 में बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु हो जाती है और उसके बाद दूसरा पेशवा बाजीराव प्रथम बनता है।

2). बाजीराव प्रथम( 1720-1740)

बाजीराव प्रथम बालाजी विश्वनाथ के एक शूरवीर पुत्र थे इन्हें गुरिल्ला युद्ध का सबसे बड़ा खिलाड़ी कहा जाता है शिवाजी के बाद बाजीराव प्रथम नेहा गोरिल्ला युद्ध पद्धति का सर्वाधिक प्रयोग किया बाजीराव प्रथम ने 1728 ईस्वी में हैदराबाद के शासक निजाम उल मुल्क को हराकर उनसे मुंशी शिवगांव की संधि किया बाजीराव प्रथम ने अपनी ओर से साहू जी को सलाह देते हुए कहा महाराज आप क्यों वृक्ष के पत्तों पर वार करते हैं चलिए अब जड़ों पर वार करते हैं। जिससे पत्तियां अपने आप खुद नीचे गिर जाएंगे। इस बात को सुनते हुए साहू जी ने बाजीराव प्रथम को अपनी ओर से कहा कि आप निशानदेही एक योग्य पिता के एक योग्य पुत्र हैं आपके प्रयासों से मराठा साम्राज्य का पताका कटक से लेकर अटक तक लहराए जाएंगे।एक बार बाजीराव प्रथम ने 1737 ईस्वी में मात्र 500 घुड़सवार लेकर के मुगल शासक मोहम्मद शाह पर आक्रमण कर दिया पूरी तरह से विजई हुआ दिल्ली को पूरी तरह से लूटा और मोहम्मद शाह से एक संधि किया जिसके तहत 5 लाख प्रतिवर्ष लेकर विदेशी आक्रमण के समय सैन्य मदद करने की वचन दिया। लेकिन 1739 में ईरान तथा एशिया के नेपोलियन  कहा जाने वाला नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया लेकिन मोहम्मद शाह के प्रति बाजीराव ने कोई भी सैन्य मदद नहीं किया था ।

साहू जी ने बाजीराव प्रथम के समय ही  पूरे मराठा साम्राज्य को पांच परिसंघ में बांट दिया था: -

बड़ौदा    -      गायकाबाड़

पूना       -      पेशवा

नागपुर     -      भौशले 

इंदौर          -    होल्कर

ग्वालियर  -       सिंधिया

बालाजी बाजीराव ( 1740-1761)

 बालाजी बाजीराव को नानासाहेब के नाम से भी जाना जाता है इस के समय मराठा साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ यही कारण है कि बालाजी बाजीराव को शिवाजी के बाद मराठा का दूसरा संस्थापक कहा जाता है 1719 ईसवी में छत्रपति शाहूजी की मृत्यु हो गया और मराठा साम्राज्य का सारा शासन पेशवा के हाथ में चला जाता है। छत्रपति अर्थात राजा के पद को संगोली संधि के तहत खत्म कर दिया था। 1752 में जल की संधि के तहत हैदराबाद के निजाम ने मराठों की अधीनता स्वीकार कर लिया 14 जनवरी 1761 को अफगान सेनापति अहमद शाह अब्दाली ने मराठा के साथ पानीपत का तृतीय युद्ध किया इस युद्ध में इस युद्ध में मराठा बुरी तरह से पराजित हो गया मराठों के मराठों को पराजय के खबर सुनकर पेशवा बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गई इतिहासकार सिडनी ओपन ने कहा है कि पानीपत का तृतीय युद्ध युद्ध या सिद्ध नहीं कर सका कि भारत में किसका शासन होगा लेकिन यह जरूर सिद्ध कर दिया कि भारत में किसी का शासन नहीं होगा

माधव राव नारायण (1761–1772)

इसके समय मराठा साम्राज्य की कोई शक्तिया मिलने लगी थी । यह एक योग्य शासक था इसने मुगल शासक शाह आलम द्वितीय को दोबारा मुगल गद्दी पर बैठाया जोकि अहमद शाह अब्दाली के डर से दिल्ली छोड़ कर भाग गया था किंतु इसी वर्ष माधवराव नारायण की मृत्यु हो जाती है नारायणरव इसका कार्यकाल बहुत छोटा था इनका चाचा रघुनाथ से इनकी हत्या कर दी गई थी।

माधव राव –II (1773 -1795)

यह भी बहुत ही अल्पायु था अतः इसे सहायता देने के लिए बार भाई परिषद का गठन किया गया था यह परिषद 12 मंत्रियों का एक समूह था इसमें सबसे प्रमुख नाना फड़नवीस तथा महदजी सिंधिया थे। रघुनाथ राव ने खुद पेशवा बनने के लिए अंग्रेजों के साथ 1775 ईस्वी में सूरत की संधि कर लिया और अंग्रेजों को उपहार में सोलसेट तथा वर्षा दे दिया किंतु बाद में अंग्रेज अपने वादे से मुकर गए अंग्रेजों तथा मराठों के बीच यही तनाव आंग्ल मराठा युद्ध का रूप ले लिया और तीन आंग्ल मराठा युद्ध हो गया।जिसे  हमलोग प्रथम ,द्वितीय तथा तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध के नाम से जानते हैं।


दोस्तों आशा करता हु की आप इस पोस्ट को पढकर मराठा साम्राज्य के बारे में exam  से रिलेटेड सारी प्रश्न  उत्तर जन गई होंगे । दोस्तों यदि आपको और भी कोई सवाल है तो कॉमेंट मे जरूर लिखे । 

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